क्रोध के समान आत्मा का कोई दूसरा शत्रु नहीं- निर्भय सागर 

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ललितपुर। क्षमा का अभाव क्रोध है, पर कहा यह जाता है कि क्रोध का अभाव क्षमा है। क्रोध क्षमा की एक ऐसी कमजोरी है जिसके कारण जसका विवेक समाप्त हो जाता है भले बुरे की पहिचान नहीं रहती। जिसपर क्रोध आता है क्रोधी उसे भला बुरा कहने लगता है क्रोध के समान आत्मा कोई दूसरा शत्रु नहीं है।
उक्त विचार जैन पार्श्वनाथ दि० जैन अटा मंदिर में पयूषण पर्व पर आचार्य निर्भय सागर महाराज ने व्यक्त करते हुए कहा क्रोध करो खुद पर श्रद्धा करो खुदा पर गुमान करो खुदी पर और क्षमा करो सभी पर कभी कोई वेर नहीं होगा। उन्होने कहा ग्रहस्थ का धर्म स्वयं के हाथ में है वहीं दशलक्षण है। यह हमारी जिन्दगी है इनके साथ जो जिए यही धर्म है जो अभाव में जीते हैं वह स्वभाव में बदलें। संसार में कर्म जैसा चलाते हैं हम चलते हैं। प्रत्येक जीव अपने कर्मों के अनुसार फल भोगता है हमारे हाथ में कुछ भी नहीं है कर्म जी कराएगा कर्म जैसा कराएगा वैसा ही जिएगे। क्रोध एक आग है जो सबको जलाती है चिगारी उठाती है और दिल को ठेस पहुंचाती है। दुश्मन के सामने कोध कर ले और अपनों के सामने राग यह श्रावक की परिणति है। इसके पूर्व धर्मसभा में मुनि शिवदत्त सागर महाराज ने कहा दशलक्षण पर्व श्रावको को जीवन में संयम और संस्कारों का शंखनाद करने आत्ता है क्षमा जीवन में उतारना होगा तभी कोध से बचेंगे। यदि अपने जीवन में कुछ ही ग्रहण कर लिया तो यह कल्याण की और प्रशस्त करता है। धर्म सभा का शुभारम्भ आचार्य श्री के चित्र के सम्मुख दीपप्रज्जवलन श्रेष्ठीजनों ने किया जबकि जैन पंचायत के पदाधिकारियों ने आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन किया जबकि ब्रहमचारिणी वहिनों ने शास्त्रदान का पुण्यार्जन  किया। धर्मसभा में बालिका माही जैन ने तत्वार्थ सूत्र का वाचन किया जबकि मंगलाचरण ममता जैन मोहनी द्वारा किया गया। धर्म सभा का संचालन महामंत्री आकाश जैन ने किया।
प्रातकाल आचार्य श्री ने श्रावको  को जैन धर्म में ध्यान और साधना की उपयोगिता बताई जिसमें अनेक युवा सम्मलित हुए।  क्षमा धर्म को जीवन में धारण करने के लिए श्रावकों को प्रेरित किया। अभिनंदनोदय तीर्थ में मुनि सुदत्त सागर महाराज एवं मुनि पदमदत्त सागर महाराज के सानिध्य में  श्रावकों ने पर्वराज पर्दूषण पर्व पर प्रभु अभिषेक शान्तिधारा की इस दौरान उन्होने धर्मसभा में श्रावकों को जीवन में क्षमा की महत्ता बताई और कहा क्षमा धारण करने से ही जीवन में शान्ति की अनुभूति मिलती है।
पर्यूषण पर्व पर जैन धर्मालु प्रातकाल जैन मंदिरों में पूजन अर्चन विधान और श्री जी के अभिषेक शान्तिधारा कर श्रावक पुर्याजन कर रहे हैं। नगर के जैन बड़ा मंदिर, जैन नया मंदिर, वहुवलि नगर, नईवस्ती आदिनाथ मंदिर चन्द्राप्रभु मंदिर डोडाघाट, शान्तिनगर मंदिर गांधीनगर इलाइट जैन मंदिर, सिविल लाइन जैन मंदिर, पाश्र्वनाथ कालौनी जैन मंदिर में इन दिनों धर्म की अपूर्व बर्मप्रभावना हो रही है। सायंकाल जैन अटामंदिर पाठशाला परिवार द्वारा  एकमिनिट प्रतियोगिता आयोजित हुई जवकि जैन नया मंदिर पाठशाला परिवार द्वारा धार्मिक अंताक्षरी भक्ति से मुक्ति विषयक हुई जिसमें बच्चों ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया।

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