सत्य पर सारे तप निर्भर जिससे ही पवित्र होती वाणी – आचार्य विनम्रसागर

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नम्रता और प्रिय वचन मनुष्य के आभूषण हैं जिनके हृदय में सत्य का वास है उसके हृदय में परमात्मा का वास रहता है सत्य को सहन करना वहित कठिन है सत्य को समझने की जरूरत है दुनिया असत्य के पीछे जा रही है। सत्य की उपासना कर असत्य को त्यागना ही सत्य बताते हुए उच्चारणाचार्य विनम्र सागर महाराज ने श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन अटा मंदिर में पर्यूषण पर्व के दौरान कहे। उन्होने कहा मन में निश्चलता पविता सदभावना हृदय में होनी चाहिए। धर्म का वास पवित्र हृदय में रहता है मन में मलिनता धर्म की तेजस्वता को नष्ट करती है। जव धर्म करेंगे तो पाप काम नहीं करेंगे। पुण्य कर्म अपने आप ही प्राप्त हो जाएगा और अच्छी गति को पाएगे। उन्होने कहा सत्य बलशाली होता है उसे सौ झूठ भले दवा लें लेकिन वह उपर आए बगैर नहीं मानेगा। सत्य प्रतिष्ठित है सत्य एक अनुभूति है सत्य वचन का पालन हर एक स्थिति में करना चाहिए सत्य का पालन जिन्होंने किया वह इस संसार से मुक्त हो गए।

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